रविवार, जनवरी 15, 2012

एक कप काफ़ी


जब तुम साथ थे तब वक्त साथ नही था,
अब वक्त साथ है तो तुम साथ नहीं हो,
तुम पर एक कप काफ़ी अभी भी उधार है |

9 टिप्‍पणियां:

  1. ब्लोग बुलेटिन से होते हुए यहाँ आना हुआ..
    बहुत सुन्दर..

    आपका लेखन बहुत भाया..अब फोलो कर रही हूँ..सो आगे भी पढ़ने का मौका मिलेगा..

    शुभकामनाएँ.

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  2. some technical problem..so can't follow..will try again later..

    keep writing..

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  3. ब्लॉग बुलेटिन से आपके ब्लॉग तक पहुँची..
    बहुत बहुत अच्छा लेखन..

    शुभकामनाएँ.

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मेरे ब्लॉग पर आ कर अपना बहुमूल्य समय देने का बहुत बहुत धन्यवाद ..