सोमवार, अप्रैल 25, 2011

मेरी तमन्ना


रोज सोचता हूँ अभी ज़िन्दा हूँ किन तमन्नाओं के लिए,
सोचते-सोचते अक्सर सो जाया करता हूँ,
खवाब में क्या देखता हूँ घर के सामने,
एक बड़ा सा पीपल  का पेड़ है,
और अपने को दरवाजे पर खड़ा,
चोटियों को ताकता पता हूँ,
और ख्वाब टूटने पर एक नन्हा पौधा पाता हूँ
जो तेज हवाओं के चलने से खिलखिला रहा है |


1 टिप्पणी:

  1. भावमय करते शब्‍दों के साथ बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

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मेरे ब्लॉग पर आ कर अपना बहुमूल्य समय देने का बहुत बहुत धन्यवाद ..